राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने कुड़ी भगतासनी थाने के कथित फर्जी कॉल सेंटर केस में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए आगे की जांच सीबीआई को सौंप दी है। जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकल पीठ ने माना कि 10 युवतियों को बिना FIR दर्ज किए घरों से उठाकर रातभर थाने में रोके रखने, पुलिस रोजनामचे में इसका उल्लेख न होने और सीसीटीवी फुटेज गायब करने जैसी परिस्थितियां पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं। ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ में सामने आया था कॉल सेंटर दरअसल, 16 जनवरी 2025 को कुड़ी भगतासनी थाने की एसआई शिमला को साइबर क्राइम यूनिट के हेड कॉन्स्टेबल प्रेम चौधरी से सूचना मिली थी कि रणबंका होटल के सामने "पावर ब्रेक डाउन सर्विस इंडिया" और "सॉल्यूशन ब्रेकडाउन सर्विस टू इंडिया" नाम से चल रहे कॉल सेंटर से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए लोगों को ठगा जा रहा है। ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के इस इनपुट के आधार पर थाने में एफआईआर दर्ज कर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट का मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण में गिरफ्तार छात्राएं लक्षिता, लक्ष्मी, सोनिया और प्रियांका मेवाड़ा सहित कुल 10 युवतियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को फर्जी रूप से फंसाए जाने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि वे सिर्फ जॉब कर रही थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें ठगी के गिरोह का हिस्सा बता दिया। सीसीटीवी से खुलासा: घर से उठाकर रातभर थाने में रोका याचिकाकर्ता प्रियांका मेवाड़ा ने हलफनामे के साथ अपने घर के सीसीटीवी की फुटेज पेश की। इसमें 15 जनवरी 2025 को शाम 5:41 से 5:43 बजे के बीच एसआई शिमला को सरकारी वाहन से आकर प्रियंका और लक्षिता को घर से ले जाते हुए देखा जा सकता है। कोर्ट ने इसे इस बात का पुख्ता सबूत माना कि युवतियों को तब उठाया गया, जब उनके खिलाफ कोई एफआईआर ही दर्ज नहीं थी। युवतियों ने आरोप लगाया कि उन्हें 15 जनवरी की शाम से 16 जनवरी की शाम तक पूरी रात थाने में रखा गया। हाईकोर्ट ने माना कि अगर पुलिस के दावे के अनुसार उन्हें 15 जनवरी की रात पूछताछ के बाद छोड़ा गया होता, तो संबंधित प्रविष्टियां पुलिस रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए थी। रोजनामचे में गोलमाल और थाने का सीसीटीवी गायब हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर को निर्देश देकर एसीपी (बोरानाडा) आनंद सिंह राजपुरोहित को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था और थाने का रिकॉर्ड मंगवाया। कोर्ट ने पाया कि एसआई शिमला के हलफनामे और एसीपी की रिपोर्ट में भारी विरोधाभास है। पुलिस का दावा था कि 15 जनवरी की रात पूछताछ के बाद युवतियों को 9 से 9:30 बजे के बीच जाने दिया गया, लेकिन थाने के रोजनामचे (शाम 4:05 बजे और रात 9:55 बजे की एंट्री) में लड़कियों को थाने लाने या छोड़ने का कोई उल्लेख ही नहीं मिला। इसके अलावा, पुलिस स्टेशन का 15 जनवरी की रात 9 बजे के बाद का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस के नियंत्रण वाले इतने महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत का गायब होना यह धारणा मजबूत करता है कि युवतियों को रातभर थाने में बंधक बनाए रखने के आरोपों को छिपाने की कोशिश की गई है। गिरफ्तारी मेमो में फर्जीवाड़ा और सुप्रीम कोर्ट की नजीरें कोर्ट की पड़ताल में पुलिस का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, 16 जनवरी को पुलिस टीम दोपहर 2:55 बजे कॉल सेंटर से युवतियों को लेकर थाने लौटी और एफआईआर दोपहर 3:37 बजे दर्ज की गई। लेकिन युवतियों की गिरफ्तारी के मेमो पर एफआईआर नंबर पहले से दर्ज था, जबकि उस वक्त तक मामला औपचारिक तौर पर जांच अधिकारी राजेंद्र चौधरी के सुपुर्द ही नहीं हुआ था। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि यह दस्तावेज बाद में फर्जी तरीके से तैयार किए जाने की ओर इशारा करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूर्यास्त के बाद बिना एफआईआर महिलाओं को घर से उठाना बीएनएसएस के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने 'डी.के. बसु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल' के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना विधिसम्मत प्रविष्टि के किसी को भी हिरासत में रखना अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का हनन है। सीबीआई करेगी स्वतंत्र जांच, ट्रायल पर रोक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब खुद स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर ही गैरकानूनी हिरासत और साक्ष्य से छेड़छाड़ जैसे आरोप हो तो उसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कुड़ी भगतासनी पुलिस एक सप्ताह के भीतर केस का पूरा रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपे। सीबीआई को मामले की स्वतंत्र जांच कर 6 माह के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी होगी। सीबीआई जांच पूरी होने तक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।
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फर्जी कॉल-सेंटर पर पुलिस कार्रवाई मामले की सीबीआई करेगी जांच:हाईकोर्ट का आदेश; थाने में युवतियों को रातभर अवैध रूप से रखने पर सवाल, CCTV गायब
बुधवार, मई 13, 2026
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