राजस्थान हाईकोर्ट ने बालिका गृह, नारी निकेतन, बाल गृह और फोस्टर होम में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं पर गंभीर रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने अधिकारियों को इन संस्थानों की मौजूदा सुविधाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं का विस्तृत ब्योरा शपथ-पत्र के जरिए पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस शपथ-पत्र में सीसीटीवी कैमरे, पावर बैकअप, चिकित्सा सुविधा, वाटर प्यूरीफायर, भोजन के उपकरण, अग्निशमन व्यवस्था, कपड़े और टॉयलेट्री सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके साथ ही, सफाईकर्मी, रसोइया और चौकीदार जैसी सेवाओं के लिए तैनात कर्मचारियों का विवरण भी प्रस्तुत करने को कहा गया है। कोर्ट ने व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था, प्रशिक्षकों के नाम व उनकी योग्यता तथा बच्चों की नियमित पढ़ाई के लिए भेजे जा रहे स्कूलों की जानकारी भी मांगी है। व्यक्तिगत दान का ब्योरा भी देना होगा संस्थानों को मिलने वाले व्यक्तिगत दान का ब्योरा भी देना होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को तत्काल अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। खंडपीठ ने संस्थानों में जगह और कमरों के विस्तार के साथ-साथ पुरुषों व महिलाओं के लिए अतिरिक्त शौचालय बनाने की प्रस्तावित योजना की जानकारी भी मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की गई है।
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बालिका गृह और नारी निकेतन की सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त:सुरक्षा, स्टाफ और दान का मांगा हिसाब, 11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
शनिवार, जुलाई 25, 2026
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