भू उपयोग परिवर्तन के पेंडिंग आवेदन के निस्तारण को लेकर गुरुवार को नगर निगम आयुक्त राहुल जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में 22 प्रकरणों को अप्रूव किया गया। आयुक्त राहुल जैन ने बताया कि शहर के विभिन्न जोन में भू उपयोग परिवर्तन के लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए पिछले डेढ़ महीने में तीन बैठक आयोजित की जा चुकी है। इसी कड़ी में गुरुवार को बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कुल 25 प्रकरण रखे गए थे। इनमें से धिकांश प्रकरण चौपासनी हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र से संबंधित थे। सभी प्रकरणों पर समिति सदस्यों ने विस्तृत चर्चा की , जिसके बाद 22 प्रकरणों को स्वीकृति दी गई , वहीं तीन प्रकरणों को आवश्यक डॉक्यूमेंट की कमी के चलने अप्रूव नहीं किया गया था। आयुक्त ने बताया कि आगामी दो सप्ताह के भीतर उपयोग परिवर्तन समिति की एक और बैठक आयोजित की जाएगी , ताकि जल्द से जल्द लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जा सके। बैठक में मौजूद हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के साथ हाउसिंग बोर्ड की फाइलों को निगम में ट्रांसफर करने की भी चर्चा की गई। बैठक में उपायुक्त अर्चना व्यास, एसटीपी जोन भूपेंद्र सिंह, निगम एसटीपी मनीष कुमार, डीटीपी गौतम माथुर , एटीपी आयुष, विधि अधिकारी मोहर सिंह सहित सभी संबंधित लिपिक मौजूद रहे। नगर निगम में हुई जनसुनवाई नगर निगम में आमजन की समस्याओं के निस्तारण के लिए जनसुनवाई हो रही है। गुरुवार को भी दोपहर 3 से शाम 4 बजे तक जनसुनवाई हुई। इसमें आयुक्त राहुल जैन ने 50 से ज्यादा लोगों की समस्या सुनी और निस्तारण को लेकर आश्वासन दिया। आयुक्त राहुल जैन ने मौके पर ही अधिकारियों को समस्याओं के निस्तारण को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। आवेदकों ने बताया कि नगर निगम से जुड़े विभिन्न कार्यों को लेकर आमजन अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं और जनसुनवाई के माध्यम से उन शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया जा रहा है।
एसईडी की पेटेंटेड एमवीआर तकनीक से ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज को मिलेगी नई दिशा स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेस लिमिटेड (एसईडी) की ओर से आज आयोजित एसईडी जेडएलडी (Zero Liquid Discharge) जोधपुर कॉन्क्लेव-2026 में उद्योगों के लिए सतत जल प्रबंधन और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट के व्यावहारिक समाधानों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि बढ़ती जल संकट, ऊर्जा लागत और पर्यावरणीय नियमों को देखते हुए ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक अब उद्योगों की आवश्यकता बन चुकी है। एसईडी के एमडी विवेक वर्मा ने बताया कि कंपनी की पेटेंटेड एमवीआर (Mechanical Vapor Recompression) आधारित लो-टेम्परेचर इवेपोरेटर तकनीक उद्योगों को कम ऊर्जा खपत के साथ अधिक पानी की रिकवरी, परिचालन लागत में कमी और संयंत्रों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि उद्योगों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी उपलब्ध कराती है। सस्टेनेबल ऑपरेटिंग मॉडल अपनाने पर जोर एसईडी के निदेशक विमर्श वर्मा ने कहा कि उद्योग अब केवल नियमों की पालना तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ऐसे समाधान तलाश रहे हैं जो संचालन को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाएं। कंपनी की एमवीआर तकनीक इसी उद्देश्य को पूरा करती है, जिससे पानी की अधिकतम रिकवरी, कम ऊर्जा उपयोग और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। वेस्टवॉटर प्रबंधन की चुनौतियों पर हुई तकनीकी चर्चा कॉन्क्लेव में टेक्सटाइल, स्टील सहित विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, प्लांट ऑप्टिमाइजेशन और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। प्रतिभागियों ने जल प्रबंधन को अधिक कुशल, पर्यावरण अनुकूल और नियमों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। 40 से अधिक देशों में सेवाएं दे रही है एसईडी प्रेस वार्ता में बताया गया कि स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेस लिमिटेड एक वैश्विक इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो शुगर, एथेनॉल, वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, इवेपोरेशन, ड्राइंग और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्रों के लिए उच्च दक्षता वाले समाधान उपलब्ध करा रही है। चार दशक से अधिक के अनुभव वाली कंपनी भारत सहित 40 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है तथा संसाधनों के संरक्षण और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
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एसईडी की पेटेंटेड एमवीआर तकनीक से ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज:जनसुनवाई में 50 समस्याओं के समाधान का आश्वासन, पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें
शुक्रवार, जुलाई 10, 2026
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