जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में चल रही प्रो कबड्डी लीग में बुधवार का दिन बेहद खास रहा। लीग के बीच एक ऐसा मुकाबला खेला गया, जिसने दर्शकों की आंखें नम कर दीं और दिलों में नया उत्साह भर दिया। पैरा खिलाड़ियों ने मैदान पर दिखाई गजब की फुर्ती मैदान पर भिड़ीं दो टीमें—पैरा वॉरियर्स और पैरा धाकड़। इस जज़्बाती मुकाबले में पैरा धाकड़ की टीम ने जीत दर्ज की, लेकिन असली जीत उन दिव्यांग खिलाड़ियों की रही जिन्होंने मजबूरी को मात देकर मैदान पर ग़ज़ब की फुर्ती दिखाई। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों को मुख्यधारा के खेलों से जोड़ना और उन्हें मंच देना है। ताकि उनकी प्रतिभा सामने आ सके। उदयपुर के मनीष सिंह चौहान बचपन से ही कबड्डी के शौकीन थे। लेकिन जब वे स्कूल में थे, तो एक हादसे ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। 11 हज़ार केवी बिजली की लाइन के संपर्क में आने से उन्होंने अपना हाथ गंवा दिया। लंबे समय तक तनाव में रहने के बाद परिवार तक ने उन्हें बोझ मान लिया, लेकिन मनीष ने हार नहीं मानी। आज वही मनीष उदयपुर कबड्डी टीम के कप्तान, राज्य स्तरीय खिलाड़ी और दो बार के मिस्टर राजस्थान रह चुके हैं। प्रो कबड्डी लीग के मंच पर उतरते ही मनीष ने कहा- मैदान पर लौटकर बेहद अच्छा लग रहा है, यही मेरी असली पहचान है। नए हौसले से आगे बढ़ती है जिंदगी हिमाचल के आर्यन परमार का सपना था कि वे प्रो कबड्डी लीग का हिस्सा बनें। उन्होंने बताया कि बचपन में कुश्ती के दौरान हाथ में चोट लगी और डॉक्टर की गलती से उनका हाथ हमेशा के लिए बेकार हो गया। स्कूल टीम ने उन्हें कह दिया- तुम कबड्डी नहीं खेल सकते। इसके बाद भी आर्यन ने जिद नहीं छोड़ी। चौथी क्लास से खेलना शुरू किया और अब तक वे चार नेशनल टूर्नामेंट में भाग ले चुके हैं। आर्यन ने कहा- आज मेरा सपना पूरा हुआ है। काश हमारे लिए भी अलग से दिव्यांग कबड्डी लीग हो, ताकि हम और बड़ा मुकाम हासिल कर सकें। इस मुकाबले ने यह साबित कर दिया कि दिव्यांग खिलाड़ी किसी से कम नहीं। खेल ने उन्हें न सिर्फ आत्मविश्वास दिया बल्कि यह संदेश भी कि ज़िंदगी किसी हादसे से रुकती नहीं, बल्कि नए हौसले से आगे बढ़ती है।
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करंट लगने पर हाथ गंवाया,आज उदयपुर कबड्डी टीम के कप्तान:हिमाचल के दिव्यांग खिलाड़ी बोले- डॉक्टर के मना करने पर भी खेला; जयपुर में प्रो-कबड्डी लीग शुरू
गुरुवार, सितंबर 25, 2025
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