कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा- मेरा राजस्थान सरकार को सुझाव है कि वह हाईकोर्ट में 1 जुलाई से पहले रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर करे और एक हलफनामा देकर कोर्ट को आश्वस्त करे कि किसानों की फसलों के लिए पानी की जरूरत नवंबर माह में होगी और राज्य सरकार आपके आदेश का पालन करेगी। वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को नहर के पानी की जरूरत अक्टूबर-नवंबर तक होगी और तब तक मानसून आने से बारिश के मौसम में पानी की उपलब्धता हो जाएगी। कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कही ये बड़ी बातें- 1. किसान हित और आपसी संवाद ही एकमात्र रास्ता: हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा- मैं एक किसान नेता हूं और सामाजिक सौहार्द व किसान हित को सर्वोपरि रखता हूँ। पूर्वी राजस्थान के दीर्घकालिक विकास के दृष्टिकोण से राजनीतिक नेताओं का व्यक्तिगत अहम् और राजनीतिक महत्वाकांक्षा किसानों की भलाई से बड़ी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी परिस्थितियां समाधान के बजाय टकराव पैदा करती हैं। किसान भाइयों को पानी की जरूरत अभी अक्टूबर-नवंबर में होगी, कमांड एरिया और लिफ्ट एरिया को भी तभी पानी की आवश्यकता होगी। इसलिए सरकार को लिफ्ट निर्माण का काम तेजी से पूरा करना चाहिए और तब तक दोनों समुदायों को आपस में संवाद करके आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहिए। अगर तब भी सरकार नहीं मानती है, तो दोनों किसान कौमों को मिलकर रेल रोकने या किसी अन्य बड़े आंदोलन का निर्णय आपसी सहमति से लेना चाहिए। हमें संवाद और एकता के साथ अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को एक सौहार्दपूर्ण, आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत पूर्वी राजस्थान मिल सके। 2. आंदोलन की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेकने वालों से सावधान: हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा- मुझे पांचना बांध के पानी के मुद्दे पर नेतृत्व कर रहे आंदोलनकारियों के बीच विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं वाले लोग दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जो बड़े राजनीतिक नेताओं और पार्टियों के इशारों पर पांचना के पानी के मुद्दे पर शह-मात का खेल खेल रहे हैं, एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं और पानी जैसे गंभीर व संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बना रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इस आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक पहचान और भविष्य की संभावनाएं तलाश रहे हैं, यानी वे इस जन-आंदोलन को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए एक लॉन्चिंग पैड के रूप में देख रहे हैं, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 3. टकराव नहीं, भाईचारे से बचेगा पूर्वी राजस्थान का भविष्य: हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा- व्यक्तिगत रूप से मैं पूर्वी राजस्थान की दो बड़ी किसान कौमों (गुर्जर और मीणा) के बीच इस प्रकार के किसी भी टकराव का समर्थक नहीं हूँ। पूर्वी राजस्थान पहले भी अविश्वास और संघर्ष के एक काले दौर को झेल चुका है। अब यहां का नागरिक फिर से उस दौर में वापस नहीं जाना चाहेगा, जहाँ डर के माहौल ने पूर्वी राजस्थान की फिजाओं में अपनी जगह बना ली थी। हमें यह कड़वा सच समझना होगा कि इस प्रकार के विवादों और टकरावों में अंतिम लाभ हमेशा किसी व्यक्ति विशेष का होता है, लेकिन इसका भारी नुकसान पूरे समुदाय को उठाना पड़ता है। इसलिए आपसी भाईचारा और सौहार्द ही हमारा एकमात्र विकल्प होना चाहिए।
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हिम्मत गुर्जर बोले-पांचना के मुद्दे पर गुर्जर-मीणा-समुदाय में संघर्ष नहीं:समाधान की आवश्यकता, आपसी संवाद ही एकमात्र रास्ता
शुक्रवार, जून 26, 2026
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