रंगमंच की बारीकियों और परदे के पीछे की चुनौतियों को समर्पित नाटक ‘रिहर्सल’ का मंचन मंगलवार को रवीन्द्र मंच के मिनी थिएटर में किया गया। यह प्रस्तुति रंगकर्मी प्रीत द्वारा आयोजित 30 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर दी गई, जिसमें नवोदित कलाकारों ने रंगमंच की मूलभूत शिल्प और निर्देशन की जटिलताओं को दर्शकों के समक्ष जीवंत किया। ‘रिहर्सल’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि रंगमंच की आत्मा – पूर्व अभ्यास – की महत्ता को रेखांकित करता है। नाटक यह दिखाता है कि कैसे एक निर्देशक और उसकी टीम मंच पर प्रस्तुति देने से पहले कई स्तरों पर मानसिक, भावनात्मक और व्यावहारिक चुनौतियों से जूझती है। संवादों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि अभिनय केवल दिखावा नहीं, बल्कि आत्म-मंथन और सामाजिक प्रतिबद्धता की प्रक्रिया है। मंच पर मृणाल चोपड़ा, असलम कुरैशी, प्रीत, मोनिका कौर, शाहरुख खान अब्बासी, महेश योगी, फरहान कुरैशी, तरुण शर्मा, कपिल कुमार, खुर्शीद आलम, अमन और अलशान कुरैशी ने अपने-अपने पात्रों में जान डाल दी। कलाकारों ने नाटक में एक निर्देशक की मनोस्थिति, कलाकारों की उलझनें, और मंच की तैयारियों की आपाधापी को रोचक और संवेदनशील अंदाज में दर्शाया। कार्यक्रम के उद्घोषक जफर खान रहे, जबकि प्रकाश परिकल्पना नरेंद्र सिंह बबल द्वारा की गई। रूप सज्जा अलफिजा कुरैशी, मंच सज्जा जितेंद्र लाटा, वस्त्र सज्जा अलसना कुरैशी, और मंच व्यवस्था मुकेश कुमार ने समर्पण के साथ तकनीकी पक्ष को संभाला। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन स्वयं प्रीत द्वारा किया गया। नाटक के दौरान दर्शक भावनाओं की लहरों में बहते नजर आए। हंसी, सोच और संवेदना के क्षणों से भरी इस प्रस्तुति को दर्शकों की तालियों और प्रशंसा ने भरपूर समर्थन दिया। विशेष रूप से रंगकर्म को समर्पित युवाओं के उत्साह और समर्पण ने साबित किया कि मंचीय कला आज भी समाज को दर्पण दिखाने का सशक्त माध्यम है।
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जयपुर में दिखी रंगमंच की चुनौतियां:एक नाटक बनाने की परेशानियों को दर्शकों के सामने पेश किया
बुधवार, जून 18, 2025
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