वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रहित, गौसंरक्षण, प्राकृतिक कृषि और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए राजस्थान को प्राकृतिक एवं जैविक कृषि राज्य घोषित करने की मांग उठाई। साथ ही गौ-आधारित कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS NIAM), अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद और प्राकृतिक कृषि आदान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक हैं, जिनका जीवन आज भी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता CCS NIAM की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरुचि माथुर ने की। इस दौरान रिसर्च एसोसिएट यतीन्द्र वर्मा ने प्राकृतिक एवं जैविक कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सतत कृषि पद्धतियां किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद एवं प्राकृतिक कृषि आदान परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। परिषद देशभर में गौसंवर्धन, गौसंरक्षण और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने राजस्थान को गौ-आधारित जैविक एवं प्राकृतिक कृषि का मॉडल राज्य बनाने का आह्वान किया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में राजस्थान को प्राकृतिक एवं जैविक कृषि राज्य घोषित करने के लिए विशेष राष्ट्रीय मिशन शुरू करने की मांग की गई है। ज्ञापन में किसानों के लिए वित्तीय पैकेज, प्रशिक्षण, अनुसंधान सुविधाएं और विपणन सहायता उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर प्राकृतिक खेती के मॉडल फार्म स्थापित किए जाएं तथा युवाओं को प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्योगों से जोड़ा जाए। साथ ही रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर पर्यावरण-अनुकूल कृषि व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। परिषद की अंतरराष्ट्रीय उप-सहसंयोजक मोनिका गुप्ता ने कहा कि देशभर की गौशालाओं, किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और सामाजिक संगठनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर गौसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। प्रमुख मांगें:
अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा- प्राकृतिक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, समृद्ध किसान और सुरक्षित पर्यावरण का आधार है।
कार्यक्रम में भारतीय सेना, वायु सेना और विभिन्न सेवाओं से जुड़े प्रतिभागियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में सभी ने महाराणा प्रताप के आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्रहित, किसान हित, गौसंरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
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राजस्थान को जैविक कृषि राज्य बनाने की मांग:महाराणा प्रताप जयंती पर प्राकृतिक खेती और गौसंरक्षण का संकल्प, प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन
शनिवार, जून 20, 2026
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