जोधपुर में दादा की हत्या करने वाले पोते को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। महानगर के अपर सेशन न्यायाधीश ललित पुरोहित ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने सगे दादा की इस प्रकार से जघन्य हत्या करने से न केवल परिवार को क्षति हुई है, बल्कि सामाजिक वातावरण और खून के रिश्तों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है।" यह मामला 26 जुलाई 2020 का है। सुबह करीब 8-8:30 बजे बंशीलाल (75) अपने 10 साल के पोते चेतन प्रकाश के साथ चिड़ियों को चुग्गा डालने के लिए भाकर (पहाड़ी) गए थे। चुग्गा डालकर लौटते समय भोमियाजी मंदिर के पास सोहनलाल ने अपने ही दादा पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस मामले में परिवादी मनोहरलाल (मृतक के पुत्र) ने राजीव गांधी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सोहनलाल ने कुल्हाड़ी से बंशीलाल के हाथों, पैरों और सिर पर गंभीर वार किए। साथ ही, चेतन प्रकाश को भी धक्का देकर गिरा दिया, जिससे उसके शरीर पर भी चोटें आईं। 4 पॉइंट में समझिए पूरा मामला... 1. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का सच डॉ. अशोक सिंह द्वारा तैयार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के शरीर पर कुल 8 स्थानों पर गंभीर चोटें थीं। सिर के दाहिने भाग पर 6 सेमी लंबा घाव था, जिस पर टांके लगे हुए थे। छाती और पेट के आगे के हिस्से पर अनेक नीले निशान थे। दाएं पैर पर भी 3 सेमी का घाव था। पोस्टमॉर्टम के दौरान पाया गया कि मृतक की दोनों तरफ की कई पसलियों में फ्रैक्चर था और पेट के भीतरी हिस्से में लगभग 2.5 लीटर खून भरा हुआ था। लीवर और स्प्लीन भी कई जगह से फटे हुए थे। डॉक्टर ने बताया कि ये सभी चोटें मौत का कारण बनीं थी। 2. कुल्हाड़ी बरामद, एफएसएल रिपोर्ट में नहीं मिला खून इसी तरह, पुलिस अनुसंधान अधिकारी इंस्पेक्टर जयकिशन की गवाही के अनुसार आरोपी सोहनलाल की इत्तला पर उसके घर से हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी बरामद की गई थी। हालांकि, एफएसएल रिपोर्ट में कुल्हाड़ी पर इंसानी खून नहीं पाया गया था, लेकिन अन्य सबूतों पर इंसानी खून मिला था। 3. मासूम पोते की चश्मदीद गवाही रही निर्णायक सोहनलाल के वकील कमलेश कच्छवाह और संतोष कुमार ने दलील दी कि चेतन प्रकाश लाभार्थी गवाह है और उसकी गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर अभियुक्त का इरादा हत्या का होता तो वह सीधी कुल्हाड़ी से वार करता, उल्टी कुल्हाड़ी से नहीं। कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि बाल साक्षी की गवाही भी अन्य गवाहों की तरह महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले मध्यप्रदेश राज्य बनाम बलवीरसिंह का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि बाल साक्षी की गवाही को अन्य गवाहों के समान ही माना जाता है। 4. आजीवन कारावास, 25 हजार रुपए जुर्माना न्यायाधीश ललित पुरोहित ने सोहनलाल को रास्ता रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाना और हत्या की धाराओं में तहत दोषी करार दिया। सजा में उसे हत्या के आरोप के तहत आजीवन कारावास और 25,000 रुपए जुर्माना, जानबूझकर चोट पहुंचाने के आरोप के तहत 1 साल का साधारण कारावास और 1,000 रुपए जुर्माना और रास्ता रोककर बाधा डालने के आरोप के तहत 1 माह का साधारण कारावास और 500 रुपए जुर्माना दिया गया। ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके साथ ही कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर को परिवादी पक्ष को प्रतिकर राशि दिलाने की सिफारिश की है।
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दादा की हत्या के आरोपी पोते को आजीवन कारावास:चिड़ियों को चुग्गा डालने पहाड़ी पर गए बुजुर्ग को कुल्हाड़ी से मारा था
रविवार, अगस्त 31, 2025
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