खैरथल के बल्लभ ग्राम स्थित स्वामी लीलाशाह कुटिया परिसर में आयुर्वेद विभाग द्वारा एक विशेष आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इसमें अर्श (पाइल्स), भगंदर (फिस्टुला) सहित विभिन्न जटिल रोगों का नि:शुल्क उपचार आयुर्वेद पद्धति से किया जा रहा है। शिविर की विशेषता यह है कि यहां आधुनिक शल्य चिकित्सा की पारंपरिक चीरफाड़ के स्थान पर आयुर्वेद की क्षार सूत्र एवं अन्य पारंपरिक विधियों से उपचार किया जा रहा है। इससे रोगियों को कम पीड़ा के साथ प्रभावी और स्थायी लाभ मिल रहा है। अब तक 9 दिनों में 3000 से अधिक रोगियों ने शिविर में परामर्श प्राप्त किया है, जबकि सैकड़ों रोगियों का सफलतापूर्वक क्षार सूत्र विधि से उपचार किया गया है। गत दिवस आयुर्वेद विभाग, जयपुर संभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. बत्ती लाल बेरवा ने शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यवस्थाओं की समीक्षा की और शिविर प्रभारी डॉ. सुरेश वर्मा को शिविर को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शिविर के दौरान सहनिदेशक डॉ. अजीत बालयाण ने उपस्थित रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता एवं वैज्ञानिक आधार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक औषधियों के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करता है। डॉ. बालयाण ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक पद्धति रोग के मूल कारणों पर कार्य कर स्थायी समाधान प्रदान करती है। शिविर में आवश्यकतानुसार रोगियों को भर्ती कर समुचित उपचार एवं देखभाल की भी व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक शिविर में भाग लिया और आयुर्वेद विभाग की इस पहल की सराहना की। ग्रामीणों ने इसे एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल बताते हुए कहा कि इस शिविर से उन्हें नि:शुल्क एवं प्रभावी उपचार का लाभ मिल रहा है। आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के शिविरों का आयोजन कर अधिक से अधिक लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ प्रदान किया जाएगा।
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खैरथल आयुर्वेद शिविर में 3000 से ज्यादा रोगियों को लाभ:9 दिनों में अर्श, भगंदर सहित जटिल बीमारियों का हुआ निशुल्क उपचार
रविवार, फ़रवरी 15, 2026
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